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Showing posts from March, 2026

Chapter :- 12 , 13 , & 14

  Chapter - 12 ( सीमा और अवकलज )     • फलन का अपेक्षित मान जो एक बिंदु के बाईं ओर के बिंदुओं पर निर्भर करता है, बिंदु पर फलन के बाएँ पक्ष की सीमा (Left handed limit) को परिभाषित करता है। इसी प्रकार दाएँ पक्ष की सीमा (Right handed limit)। • एक बिंदु पर फलन की सीमा बाएँ पक्ष और दाएँ पक्ष की सीमाओं से प्राप्त उभयनिष्ठ मान हैं यदि वे संपाती हों। • यदि किसी बिंदु पर बाएँ पक्ष और दाएँ पक्ष की सीमाएँ संपाती न हों तो यह कहा जाता है कि उस बिंदु पर फलन की सीमा का अस्तित्व नहीं है। • एक वास्तविक संख्या aऔर एक फलन f के लिए lim f(x) और f(a) समान नहीं भी xa हो सकते (वास्तव में, एक परिभाषित हो और दूसरा नहीं) • फलनों और g के लिए निम्नलिखित लागू होते हैं: lim[f(x)+g(x)]=lim f(x)+lim g(x) xa xa xa lim[f(x).g(x)]= lim f(x).lim g(x) xa xa f(x) lim f(x) lim xa xa g(x) lim g(x) D-X xa • निम्नलिखित कुछ मानक सीमाएँ हैं। x" -a" lim -=na"-1 xa x-a sin x lim =1 0-x X • lim x -> 0 (1 - cos x)/x = 0 • a पर फलन f का अवकलज से परिभाषित होता है। f' * (a) = lim h -> 0 (f(a + h) - f(a))/h • प्रत...

Chapter - 09, 10 & 11

Chapter :- 08 ( सरल रेखाएं )     • (x, y) और (x, y₂) बिंदुओं से जाने वाली ऊर्ध्वत्तर रेखा की ढाल m इस प्रकार है m = У2-У1 – У-У2, X17X2. = X2-X1 X1-X2 • यदि एक रेखा x-अक्ष की धन दिशा से α कोण बनाती है तो रेखा की ढाल m = tan α , α ≠ 90° है। • क्षैतिज रेखा की ढाल शून्य है और ऊर्ध्वाधर रेखा की ढाल अपरिभाषित है। • m₁ और m₂ ढालों वाली रेखाओं L, और L₂ के बीच का न्यून कोण 0 (मान लिया) हो तो m2-m₁ ,1 + m₁ m₂ ≠ 0 tane = 1+ mm2 • दो रेखाएँ समांतर होती हैं यदि और केवल यदि उनके ढाल समान हैं। • दो रेखाएँ लंब होती हैं यदि और केवल यदि उनके ढालों का गुणनफल -1 है। • तीन बिंदु A, B और C सरेख होते हैं यदि और केवल यदि AB की ढाल = BC की ढाल । • x-अक्ष से व दूरी पर स्थित क्षैतिज रेखा का समीकरण या तो y = a या y = - a है। • y -अक्ष से b दूरी पर स्थित ऊर्ध्वाधर रेखा का समीकरण या तो x = b या x = - b • स्थिर बिंदु (x, y) से जाने वाली और ढाल m वाली रेखा पर बिंदु (x, y) स्थित होगा यदि और केवल यदि इसके निर्देशांक समीकरण y-yo = m (x-x) को संतुष्ट करते हैं। • बिंदुओं (x, y₁) और (x, y₂) से जाने वाली रेखा...

Chapter - 04 , 05, 06 , 07 & 08

  Chapter - 04 (सम्मिश्र संख्याएं और द्विघातीय समीकरण )  •  a + ib के प्रारूप की एक संख्या, जहाँ व और b वास्तविक संख्याएँ हैं, एक सम्मिश्र संख्या कहलाती है, व सम्मिश्र संख्या का वास्तविक भाग और b इसका काल्पनिक भाग कहलाता है। • माना z = a + ib और z₂ = c + id, तब (i) z₁ +z₂ = (a + c) + i (b + d) (ii) z,Z2 = (ac-bd) + i (ad+bc) • किसी शून्येत्तर सम्मिश्र संख्या z = a + ib (a ≠ 0, b ≠ 0) के लिए, एक सम्मिश्र संख्या ( a = 0 , b = 0 ) के लिए एक सम्मिश्र संख्या a/ a²+b² + I -b/ a²+b² , का अस्तित्व होता है इसे 1/z या z -¹   द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है । और z का गुणात्मक प्रतिलोम कहलाता है जिससे कि (a + ib)((a ^ 2)/(a ^ 2 + b ^ 2) + i * (- b)/(a ^ 2 + b ^ 2)) = 1 + i * 0 = 1 प्राप्त होता है । • किसी पूर्णांक k के लिए, i ^ (4k) = 1 , i4k+1 = i, j4k + 2 = 1, j4k + 3 = - i • सम्मिश्र संख्या z = a + ib का संयुग्मी 2 द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है और z = a -ib द्वारा दर्शाया जाता है। Chapter :- 05 ( रैखिक असमिकाऍ )  • एक असमिका, दो वास्तविक संख्याओं या दो बीजीय व्यंजकों ...

Chapter - 02 & 03

  Chapter - 02  ( संबंध एवं फलन )  (i) दो क्रमित युग्म समान होते हैं, यदि और केवल यदि उनके संगत प्रथम घटक समान हों और संगत द्वितीय घटक भी समान हों। (ii) यदि A में p अवयव तथा B में q अवयव हैं, तो AX B में pq अवयव होते हैं अर्थात् यदि n(A) = p तथा n (B) = q, तो n(A × B) = pq. (iii) यदि A तथा B अरिक्त समुच्चय हैं और A या B में से कोई अपरिमित है, तो A × B भी अपरिमित समुच्चय होता है। (iv) A×A×A = {(a, b, c): a, b, c∈ A}. यहाँ (a, b, c) एक क्रमित त्रिक कहलाता है। • A से A के संबंध को 'A पर संबंध' भी कहते हैं। • यदि (a, b) = (x, y) तो a=x तथा b=y • A×¢ =¢ फलनों का बीजगणित -  (f+g) (x) = f(x) + g(x), x ∈ X (f-g) (x) = f (x) - g(x), x ∈ X  (f.g) (x) = f (x) .g (x), x ∈ X, k कोई अचर है।  (kf) (x) = k (f(x)), x ∈ X  f(x) = f(x) g g(x) , x ∈ X, g(x) ≠ 0 कुछ परिभाषाएं :-  • किसी अरिक्त समुच्चय A से अरिक्त समुच्चय B में संबंध कार्तीय गुणन A × B का एक उपसमुच्चय होता है यह उपसमुच्चय A × B के क्रमति युग्मों के प्रथम तथा द्वितीय घटकों के मध्य एक संबंध स्थापित करने ...

Math Formula For Class - XI

 Chapter No.                   Chapter Name  01.                      समुच्चय 02.                  संबंध एवं फलन  03.   त्रिकोणमितीय फलन 04.      सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण⋂ 05.      रैखिक असमिकाएँ 06.       क्रमचय और संचय 07.         द्विपद प्रमेय 08.           अनुक्रम तथा श्रेणी 09.         सरल रेखाएँ 10.          शंकु परिच्छेद 11.          त्रिविमीय ज्यामिति का परिचय 12.                 सीमा और अवकलज 13.                सांख्यिकी 14.              प्रायिकता Chapter :- 01  ⋗  कुछ उदाहरण , जिनका प्रयो...