Chapter - 04 , 05, 06 , 07 & 08
Chapter - 04 (सम्मिश्र संख्याएं और द्विघातीय समीकरण )
• a + ib के प्रारूप की एक संख्या, जहाँ व और b वास्तविक संख्याएँ हैं, एक सम्मिश्र संख्या कहलाती है, व सम्मिश्र संख्या का वास्तविक भाग और b इसका काल्पनिक भाग कहलाता है।
• माना z = a + ib और z₂ = c + id, तब
(i) z₁ +z₂ = (a + c) + i (b + d)
(ii) z,Z2 = (ac-bd) + i (ad+bc)
• किसी शून्येत्तर सम्मिश्र संख्या z = a + ib (a ≠ 0, b ≠ 0) के लिए, एक सम्मिश्र संख्या
( a = 0 , b = 0 ) के लिए एक सम्मिश्र संख्या a/ a²+b² + I -b/ a²+b² , का अस्तित्व होता है इसे 1/z या z -¹
द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है । और z का गुणात्मक प्रतिलोम कहलाता है जिससे कि (a + ib)((a ^ 2)/(a ^ 2 + b ^ 2) + i * (- b)/(a ^ 2 + b ^ 2)) = 1 + i * 0 = 1 प्राप्त होता है ।
• किसी पूर्णांक k के लिए, i ^ (4k) = 1 , i4k+1 = i, j4k + 2 = 1, j4k + 3 = - i
• सम्मिश्र संख्या z = a + ib का संयुग्मी 2 द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है और z = a -ib द्वारा दर्शाया जाता है।
Chapter :- 05 ( रैखिक असमिकाऍ )
• एक असमिका, दो वास्तविक संख्याओं या दो बीजीय व्यंजकों में <, >, < या > के चिह्न के प्रयोग से बनती है।
• एक असमिका के दोनों पक्षों में समान संख्या जोड़ी या घटायी जा सकती है।
• किसी असमिका के दोनों पक्षों को समान धनात्मक, संख्या से गुणा (या भाग) किया जा सकता है। परंतु दोनों पक्षों को समान ऋणात्मक संख्याओं से गुणा (या भाग) करने पर असमिका के चिह्न तदनुसार बदल जाते हैं।
• x के उन मानों (Values) को जो दिए गए असमिका को एक सत्य कथन बनाते हों, उन्हें असमिका का हल कहते हैं।
• x < a (या x > a) का संख्या रेखा पर आलेख खींचने के लिए संख्या रेखा पर संख्या a पर एक छोटा सा वृत्त बनाकर, व से बाईं (या दाईं) ओर की संख्या रेखा को गहरा काला कर देते हैं।
• x ≤ a (या x ≥ a) का संख्या रेखा पर आलेख खींचने के लिए संख्या रेखा पर संख्या a पर एक छोटा काला वृत्त बनाकर व से बाईं (या दाईं) ओर की संख्या रेखा को गहरा काला कर देते हैं।
Chapter :- 06 ( क्रमचय और संचय )
• क्रमचय एक निश्चित क्रम में बना विन्यास है, जिसको दी हुई वस्तुओं में से एक समय में कुछ या सभी को लेकर बनाया गया है।
• गणना का आधारभूत सिद्धांतः यदि एक घटना m विभिन्न तरीकों से घटित हो सकती है, तोपरांत एक दूसरी घटना ॥ विभिन्न तरीकों से घटित हो सकती है, तो प्रदत्त क्रम में घटनाओं में घटनाओं के घटित होने की संख्या m × n है।
• n विभिन्न वस्तुओं में से एक समय में को लेकर बनने वाले क्रमचयों की संख्या, जबकि पुनरावृत्ति की अनुमति है, n' है।
• n विभिन्न वस्तुओं में से एक समय में r को लेकर बनने वाले क्रमचयों की संख्या, जबकि पुनरावृत्ति की अनुमति नहीं है, "P, द्वारा प्रकट की जाती है और जहां
• n! = 1 × 2 × 3 × ...x n
• n! = n x (n - 1 ) !
• n वस्तुओं में से एक समय में सभी को लेकर बनने वाले क्रमचयों की संख्या Pi! P2!... P! है जहाँ p₁ वस्तुएँ एक प्रकार की,p, वस्तुएँ दूसरे प्रकार की, .... p₁ वस्तुएँ k वें प्रकार की और शेष सभी वस्तुए, यदि कोई हैं तो विभिन्न प्रकार की हैं:
• n विभिन्न वस्तुओं में से एक समय में को लेकर बनने वाले संचयों की संख्या को "C, से प्रकट करते हैं और "C = n! r!(n-r)!' 0≤r≤n.
• n विभिन्न वस्तुओं में से केवल उन तरीकों की संख्या की गणना करना है जहाँ कुछ भी वस्तु लिए बिना बनाए गए संचयों की संख्या 1 मानी जाती है। अर्थात् ñç⁰
• n! n! (n Ju = i4i(1-4) - ((4-1)-u);(1-4) --=
Chapter :- 07 ( द्विपद प्रमेय )
• एक द्विपद का किसी भी धन पूर्णांक n के लिए प्रसार द्विपद प्रमेय द्वारा किया जाता है।
इस प्रमेय के अनुसार
(a + b)" = "Ca" + "C₁a"-1b + "C₂a"-2b2 + ... + "C₁₁₁a.b"-1 + "C"b"
• प्रसार के पदों के गुणांकों का व्यवस्थित क्रम पास्कल त्रिभुज कहलाता है।
• सर्वसमिकाऍ :-
(a + b) ^ 0 = 1 ; a+b ≠0
(a + b) ^ 1 = a + b
(a + b) ^ 2 = a ^ 2 + 2ab + b ^ 2
(a + b) ^ 3 = a ^ 3 + 3a ^ 2 * b + 3a * b ^ 2 + b ^ 3
(a + b) ^ 4 = (a + b) ^ 3 * (a + b) = a ^ 4 + 4a ^ 3 * b + 6a ^ 2 * b ^ 2 + 4a * b ^ 3 + b ^ 4
Chapter :- 08 (अनुक्रम तथा श्रेणी )
• एक अनुक्रम में जो संख्याएँ आती हैं उन्हें हम उसका पद कहते हैं।
• प्रत्येक पद के साथ लगी संख्या को पदांक कहते हैं ।
• वे अनुक्रम, जिनमें पदों की संख्या सीमित होती हैं, उसे 'परिमित अनुक्रम' कहते हैं।
• गुणोत्तर श्रेणी के n पदों का योगफल Sn
Sn = (a(1 - r ^ n))/(1 - r) * pi_{n}*S_{n} = (a(r ^ n - 1))/(r - 1)
• गुणोत्तर माध्य = G_{n} = a * r ^ n = a * (b/a) ^ (n/(n + 1))
• कोई दो धनात्मक संख्याएँ a तथा b का गुणोत्तर माध्य √ab है अर्थात् अनुक्रम a, G, b गुणोत्तर श्रेणी में हैं।
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