Chapter - 02 & 03

 Chapter - 02  ( संबंध एवं फलन ) 

(i) दो क्रमित युग्म समान होते हैं, यदि और केवल यदि उनके संगत प्रथम घटक समान हों और संगत द्वितीय घटक भी समान हों।

(ii) यदि A में p अवयव तथा B में q अवयव हैं, तो AX B में pq अवयव होते हैं अर्थात् यदि n(A) = p तथा n (B) = q, तो n(A × B) = pq.

(iii) यदि A तथा B अरिक्त समुच्चय हैं और A या B में से कोई अपरिमित है, तो A × B भी अपरिमित समुच्चय होता है।

(iv) A×A×A = {(a, b, c): a, b, c∈ A}. यहाँ (a, b, c) एक क्रमित त्रिक कहलाता है।

• A से A के संबंध को 'A पर संबंध' भी कहते हैं।

• यदि (a, b) = (x, y) तो a=x तथा b=y

• A×¢ =¢

फलनों का बीजगणित - 

(f+g) (x) = f(x) + g(x), x ∈ X

(f-g) (x) = f (x) - g(x), x ∈ X

 (f.g) (x) = f (x) .g (x), x ∈ X, k कोई अचर है। 

(kf) (x) = k (f(x)), x ∈ X 

f(x) = f(x) g g(x) , x ∈ X, g(x) ≠ 0

कुछ परिभाषाएं :- 

• किसी अरिक्त समुच्चय A से अरिक्त समुच्चय B में संबंध कार्तीय गुणन A × B का एक उपसमुच्चय होता है यह उपसमुच्चय A × B के क्रमति युग्मों के प्रथम तथा द्वितीय घटकों के मध्य एक संबंध स्थापित करने से प्राप्त होता है। द्वितीय घटक, प्रथम घटक का प्रतिबिंब कहलाता है।

• समुच्चय A से समुच्चय B में संबंध R के क्रमित युग्मों के सभी प्रथम घटकों के समुच्चय को संबंध R का प्रांत कहते हैं।

• समुच्चय A से समुच्चय B में संबंध R के क्रमित युग्मों के सभी द्वितीय घटकों के समुच्चय को संबंध R का परिसर कहते हैं। समुच्चय B संबंध R का सह-प्रांत कहलाता है।

• एक समुच्चय A से समुच्चय B का संबंध, f एक फलन कहलाता है, यदि समुच्चय A के प्रत्येक अवयव का समुच्चय B में, एक और केवल एक प्रतिबिंब होता है।

• यदि f, A से B का एक फलन है तथा (a, b) ∈ f, तो f (a) = b, जहाँ b को f के अंतर्गत a का प्रतिबम्ब तथा a को b का 'पूर्व प्रतिबिंब' कहते हैं।

• एक ऐसे फलन को जिसका परिसर वास्तविक संख्याओं का समुच्चय या उसका कोई उपसमुच्चय हो, वास्तविक मान फलन कहते हैं। यदि वास्तविक चर वाले किसी वास्तविक मान फलन का प्रांत भी वास्तविक संख्याओं का समुच्चय अथवा उसका कोई उपसमुच्चय हो तो इसे वास्तविक फलन भी कहते हैं।




Chapter - 03 ( त्रिकोणमितीय फलन ) 

 • डिग्री माप (Degree measure) : यदि प्रारंभिक भुजा से अंतिम भुजा का घुमाव एक पूर्ण परिक्रमण का ( 1/360) वाँ भाग हो तो हम कोण का माप एक डिग्री कहते हैं, इसे 1° से लिखते हैं।

1° = π/180 रेडियन 

• रेडियन माप (Radian measure) : कोण को मापने के लिए एक दूसरी इकाई भी है, जिसे रेडियन माप कहते हैं। 

1 रेडियन = 180/π 

• त्रिकोणमितीय अनुपातों की सारणी :- 

See in table 


• cos^2 x + sin^2 x = 1

• 1 + tan^2 x = sec^2 x

• 1 + cot^2 x = co * sec^2 x

• cos(2n*pi + x) = cos x

• sin(2n*pi + x) = sin x

• sin(- x) = - sin x

• cos(- x) = cos x

• cos(x + y) = cos x * cos y - sin x * sin y

• cos(x - y) = cos x * cos y + sin x * sin y

• cos(pi/n - x) = sin x

• sin(pi/2 - x) = cos x

• sin(x + y) = sin x * cos y + cos x * sin y

• sin(x - y) = sin x * cos y - cos x * sin y

• cos(pi/2 + x) = - sin x

• sin(pi/2 + x) = cos x

• cos(pi - x) = - cos x

• sin(pi - x) = sin x

• cos(pi + x) = - cos x

• sin(pi + x) = - sin x

• cos(2pi - x) = cos x

• sin(2pi - x) = - sin x

• यदि x, y और (x + y) में से कोई कोण का विषम गुणांक नहीं हैं. तो tan x + tan y tan (x + y) = 1- tan x tan y π 2


(i) cos x + cos y = 2cos((x + y)/2) * cos((x - y)/2)

(ii) cos x - cos y = - 2sin((x + y)/2) * sin((x - y)/2)

(iii) sin x + sin y = 2sin((x + y)/2) * cos((x - y)/2)

(iv) sin x - sin y = 2cos((x + y)/2) * sin((x - y)/2)

(i) 2cos x * cos y = cos(x + y) + cos(x - y)

(ii) - 2sin x * sin y = cos(x + y) - cos(x - y)

(iii) 2sin x * cos y = sin(x + y) + sin(x - y)

(iv) 2cos x * sin y = sin(x + y) - sin(x - y)


Comments

Popular posts from this blog

Chapter - 04 , 05, 06 , 07 & 08

Share